मदीना मुनववरा के बारे मैं सब ये खबर ज़रूर पढ़े और ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे

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नाज़रीने किराम अस्सलामुअलैकुम ,इस बार हम आपकी खिदमत में तारीख ए मदीना मुनव्वरा पेश कर रहे है।मदीना शहर मक्का मुकररामा से 450 किलोमीटर दूर एक बहुत ही खूबसूरत और मुकद्दस शहर है हर सच्चे मुसलमान के दिल में मदीना ए मुनव्वरा की तड़प कुदरती तौर पर मौजूद है। वो दिल बहुत ही सख्त होंगे जिनमे मदीना ए मुनव्वरा की मुहब्बत मौजूद ना हो। मदीना शहर इस्लाम का दूसरा मुकद्दस तरीन शहर है।जबकि इस्लाम का पहला मुकद्दस तरीन शहर मक्का है।

मदीना शहर सब शहरों का सरदार है।जिस तरह मक्का हुरमत वाला शहर है। उसी तरह मदीना शहर भी हुरमत वाला शहर है।यहां भी जुल्म ओ सितम, जंग,लड़ाई झगड़ा, कतलो गारत, झाडो का तोड़ना, जानवरों का शिकार ये सब नहीं किया जा सकता।मदीना दारुल हिज्रा है ।शहरे मदीना की कितनी बड़ी फजीलत है इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते है कि यहां नबी ए करीम स. खुद हिजरत करके गए।शहरे मदीना वही नाजिल होने का मकाम भी है। अक्सर और बेश्तर जो वही नाजिल हुई मक्का के बाद वो मदीना में ही नाजिल हुई है। नबी ए करीम स. ने इस शहर को पसंद किया है और खुद हिजरत करके मदीना गए।

और आप स. ने अपने आप को बाद में यही रखा और आप स. की वफात भी इसी शहर में हुई।

मदीना शहर जितना सुकून, आपको पूरी दुनिया में किसी और शहर में नहीं मिलेगा। अगर आप कभी मदीना गए होंगे तो आप को जरुर पता होगा कि मदीने की आबो हवा में अल्लाह तआला ने कितना सुकून रखा है। जो एक बार मदीने चला जाता है। उसका वहां मदीना छोड़ने का मन ही नहीं करता। आप स. भी इसी शहर में दफ्न है। यही पर आप स. का रोज़ा ए मुबारक है। यही नहीं आपकी अज़ीम मस्जिद , मस्जिद ए नबवी भी इसी में मौजूद है।ये दो इम्तियाज़ ऐसे है जो किसी दूसरे शहर को हासिल नहीं।मदीना शहर में मौजूद मस्जिद ए नबवी दुनिया की सबसे खूबसूरत मस्ज़िदों में से एक है। मस्जिद ए नब्वी पूरे आलम ए इस्लाम के मुसलमानो के लिए एक मुकद्दस मकाम रखती है।

मस्जिद ए नब्वि में एक नमाज़ पढ़ने का सवाब एक हजार नमाज के बराबर है यानी दूसरी मस्जिदों के मुकाबले मस्जिद ए नब्वि में एक नमाज़ का सवाब एक हजार नमाज़ के बराबर मिलता है जबकि मस्जिद अल हराम मक्का में एक नमाज़ एक लाख नमाज़ के बराबर और मस्जिद ए अक्सा में 500 नमाज़ के बराबर सवाब मिलता है।

मस्जिद ए नबवी दुनिया की सबसे महंगी मस्जिदों में से एक है। जिसकी कीमत का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन सा है।
जिसकी कीमत अगर रुपयों में आंकी जाए तो इसको बनाने में खर्च हुई दौलत के आगे बड़े बड़े दौलतमंद भी गरीब नजर आते है।मदीने की फजीलत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि ,किसी शख्स के लिए ये भी दुरुस्त नहीं कि मदीना के अंदर वो लड़ाई के लिए हथियार उठाए और ना ही यह जायज है कि इसके दरख़्त काटे जाए अलबत्ता ऊंट को चराने के लिए दरख़्त की एक आध टेहनी काट सकते हैं। शहरे मदीना में सिवाय जानवर को खिलाने लिए किसी और काम के लिए दरख़्त काटने तक की भी मुमानियत है।शहरे मदीना में हथियार उठाने की मुमानियत है।

मक्का और मदीना दो ऐसे शहर है। जहां पर दजजाल भी दाखिल नहीं होगा। दज्जाल दुनिया के बाकी शहरों में घूमेगा लेकिन मक्का और मदीना में दाखिल नहीं हो सकता इससे भी आप इस की फजीलत का अंदाजा लगा सकते हैं।शहरे मदीना से मुताल्लिक नबी ए करीम स. ने फरमाया मदीना आइर पहाड़ी से लेकर फला मकाम तक हरम है। जिसने इस हद में कोई बिद अत निकाली या किसी बिद अति को पनाह दी तो उस पर अल्लाह और तमाम फरिश्तों और इंसानों की लानत है, ना उसकी कोई फर्ज़ इबादत मकबूल है और ना नफ्ल और आप स. ने ये भी फरमाया कि तमाम मुसलमानो में से किसी का भी एहद काफी है इसलिए अगर किसी मुसलमान की दी हुई अमान में दूसरे मुसलमान ने बद एहदी की तो उस पर अल्लाह तआला और तमाम फ़रिश्ते और इंसानों की लानत है। ना उसकी कोई फर्ज़ इबादत मकबूल है और ना नफ़्ल।

और जो कोई अपने मालिक को छोड़कर उसकी इजाज़त के बगैर किसी दूसरे को मालिक बनाए। इस पर भी अल्लाह तआला और तमाम फ़रिश्ते और इंसानों की लानत है। ना उसकी कोई फर्ज़ इबादत मकबूल है और ना नफ़्ल। शहरें मदीना के बारे में आप स. ने फरमाया कि मुझे एक ऐसे शहर में हिजरत का हुक्म हुआ है। जो दूसरे शहरों को खालेगा यानि सबका सरदार बनेगा।मुनाफिकीन इसे यसरब कहते है लेकिन इसका नाम मदीना है। वह बुरे लोगो को इस तरह बाहर कर देता है जिस तरह भट्टी लोहे के जंग को निकाल देती है।

हज़रत अबू हुरैरा रजि अल्लाहु त आला अन्हुमा फरमाया करते थे कि अगर मैं मदीने में हिरण चरते हुए देखू तो इन्हे कभी ना छेडू क्योंकि आप स. ने फरमाया कि मदीने की जमीन दोनों पथरीले मैदानों के बीच में हरम है। आप स. ने फरमाया तुम लोग मदीने को बेहतर हालत में छोड़ जाओगे फिर वह ऐसा उजाड़ हो जाएगा कि फिर वहां वहशी जानवर दरिंद और परिंद बसने लगेंगे और आखिर में मजीना के दो चरवाहे मदीना आएंगे ताकि अपनी बकरियों को हांक ले जाए लेकिन वहां इन्हें सिर्फ वहशी जानवर नजर आएंगे आखिर सनी अतुल विदा तक जब पहुंचेंगे तो अपने मुंह के बल गिर पड़ेंगे।सही बुखारी हदीस न. 1874

आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि यमन फतेह होगा तो लोग अपनी सवारियों को दौड़ाते हुए लाएंगे और अपने घर वालों को और उनको जो उनकी बात मान जाएंगे सवार करके मदीना से वापस यमन को ले जायेंगे। काश इन्हें मालूम होता कि मदीना ही इनके लिए बेहतर था और इराक फतेह होगा तो कुछ लोग अपनी सवारियों को तेज दौड़ाते हुए लाएंगे और अपने घरवालों को और जो उनकी बात मानेंगे अपने साथ इराक़ वापस ले जाएंगे काश इन्हें मालूम होता कि मदीना ही उनके लिए बेहतर था। सही बुखारी हदीस 1875 ,हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला ने बयान किया कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि कयामत के करीब ईमान मदीना में इस तरह सिमट आएगा जैसे सांप सिमट कर अपने बिल में आ जाया करता है।

नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम मदीने के मेहलात में से एक महल यानि ऊंचे मकान पर चढ़े फिर फरमाया के जो कुछ मैं देख रहा हूं क्या तुम्हें नजर आ रहा है मैं बूंदों के गिरने की जगह की तरह तुम्हारे घरों पर फितनो के नाजिल होने की जगहों को देख रहा हूं। इस रिवायत की मुताब अत मा अमर और सुलेमान बिन कसीर ने ज़हरी के वास्ते से की है। मदीने पर दज्जाल का रा अब भी नहीं पड़ेगा इस दौर में मदीना के सात दरवाजे होंगे और हर दरवाजे पर दो फरिश्ते होंगे। आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि मदीना के रास्तों पर फरिश्ते है ना उसमें ताऊन आ सकता है ना दज्जाल। आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कोई ऐसा शहर नहीं मिलेगा। जिसे दज्जाल पामाल ना करेगा सिवाय मक्का और मदीना के। इनके हर रास्ते पर सफ बस्ता फरिश्ते खड़े होंगे जो इनकी हिफाजत करेंगे फिर मदीना की जमीन 3 मर्तबा कांपेगी । जिससे एक एक काफिर और मुनाफिक को अल्लाह त आला इसमें से बाहर कर देगा।

अबू सईद खुदरी रजि अल्लाहु त आला अन्हू ने बयान किया कि हमसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने दज्जाल के मुतालिक एक लंबी हदीस बयान कि आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने अपनी हदीस में यह भी फरमाया था कि दज्जाल मदीना की एक खारी शोर जमीन तक पहुंचेगा। इस पर मदीने में दाखिला तो हराम होगा । मदीने से इस दिन एक शख्स की इसकी तरफ निकल कर बढ़ेगा। यह लोगों में एक बेहतरीन एक मर्द होगा या यह फरमाया के बुजुर्ग तरीन लोगों में से होगा वह शक्स कहेगा कि मैं गवाही देता हूं कि तू वही दज्जाल है जिसके मूताल्लिक हमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने इत्तला दी थी दज्जाल कहेगा क्या मैं इसे कत्ल कर के फिर जिंदा कर डालू। तो तुम लोगों को मेरे मुआमला में कोई शुभा रह जाएगा।

इसके हवारी कहेंगे नहीं। चुनाचे दज्जाल इन्हें कत्ल करके फिर जिंदा कर देगा।जब दज्जाल इन्हे जिंदा कर देगा तो वह बंदा कहेगा कि बा खुदा अब तो मुझको पूरा हाल मालूम हो गया कि तू ही दज्जाल है। दज्जाल कहेगा लाओ इसे फिर कत्ल कर दूं लेकिन इस मर्तबा वह काबू ना पा सकेगा। एक अरबी ने नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की खिदमत में हाजिर होकर इस्लाम पर बे अत की। दूसरे दिन आया तो उसे बुखार चढ़ा हुआ था कहने लगा कि मेरी बे अत तोड़ दीजिए ।तीन बार उसने यही कहा ,आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने इनकार किया फिर फरमाया कि मदीना की मिसाल भट्टी की सी है कि मेल कुचैल को दूर करके खालिस जोहर को निखार देती है।

अनस रजि अल्लाहूं अन्हु ने बयान किया कि आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम जब कभी सफर से वापस आते हैं और मदीना की दीवारों को देखते तो अपनी सवारी तेज फरमा देते और अगर किसी जानवर की पुष्त पर होते तो मदीना की मोहब्बत में इसे ऐड लगा दे।हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ने फरमाया कि नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया मेरे घर और मेरे मिंबर के दरमियान वाली जगह जन्नत के बागों में से एक बाग है और मेरा मिमबर कयामत के दिन मेरे होज कौसर पर होगा।

सुभानल्लाह ऐसा है मेरे नबी का शहर। मुसलमान होने के नाते अगर आपको फख्र महसूस हुआ हो, तो इसको शेयर जरुर करे।

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